'मनरेगा अंतिम-छोर पर खड़े व्यक्ति को ध्यान में रखकर बनाया':कांग्रेसी बोले- इससे 5 करोड़ लोग BPL से मध्यम वर्ग में शामिल हो पाए
कांग्रेस पार्टी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बचाने के लिए अपने राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत रविवार को मनरेगा बचाओ संग्राम-जनआंदोलन का शंखनाद किया। जिला मुख्यालय स्थित अंबेडकर पार्क में जिला प्रभारी रामसिंह कस्वां, सांसद बृजेन्द्र ओला, पूर्व मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और जिलाध्यक्ष रीटा चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक दिवसीय उपवास रखकर केंद्र की भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। अंतिम छोर के व्यक्ति की ढाल है मनरेगा: रामसिंह कस्वां धरना स्थल पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जिला प्रभारी रामसिंह कस्वां ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि कांग्रेस द्वारा अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को ध्यान में रखकर बनाया गया एक ऐतिहासिक कानून है। उन्होंने कहा इस कानून ने देश के 12 करोड़ लोगों को 'काम का अधिकार' दिया है। मनरेगा की बदौलत ही 5 करोड़ लोग गरीबी रेखा (BPL) से निकलकर मध्यम वर्ग में शामिल हो पाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बजट में कटौती कर और गांधी जी का नाम हटाकर इस योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश रच रही है, जिसे कांग्रेस कभी कामयाब नहीं होने देगी। इस दौरान सांसद बृजेन्द्र ओला ने भी केंद्र की श्रमिक विरोधी नीतियों की आलोचना की। कार्यक्रम में ओबीसी कांग्रेस जिलाध्यक्ष संतोष सैनी, डीसीसी उपाध्यक्ष राजकुमार ढाका सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, अग्रिम संगठनों के कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे। राज्यों पर आर्थिक बोझ डाल रही है केंद्र सरकार: रीटा चौधरी मंडावा विधायक व जिलाध्यक्ष रीटा चौधरी ने तकनीकी पहलुओं पर केंद्र को घेरते हुए कहा कि केंद्र ने अपने हिस्से की राशि को 90% से घटाकर 60% कर दिया है। उन्होंने कहा कि पहले से ही कर्ज में डूबे राज्यों के लिए 40% हिस्सा वहन करना मुश्किल होगा, जिससे स्थानीय स्तर पर काम ठप हो जाएंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि "एसी कमरों में बैठे लोग यह कैसे तय कर सकते हैं कि किस पंचायत में क्या काम होना चाहिए? यह अधिकार पंचायतों का है और उन्हीं के पास रहना चाहिए। शांति और अहिंसा के प्रतीक गांधी का नाम मिटाने की कोशिश: डॉ. जितेंद्र सिंह पूर्व मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार केवल नाम बदलने की राजनीति कर रही है। महात्मा गांधी विश्वभर में शांति और अहिंसा के पर्याय हैं, उनका नाम योजना से हटाना उनकी संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों का भला केवल 'राम' का नाम जपने से नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक 'काम' देने से होगा। महीने भर चलेगा आंदोलन