हनुमानगढ़ में घना कोहरा छाया:50 मीटर से भी कम रही विजिबिलिटी, 3 दिन राहत के आसार कम
हनुमानगढ़ में शनिवार देर रात से घना कोहरा छा गया, जो रविवार सुबह तक बना रहा। शहर और देहात के कई इलाकों में विजिबिलिटी इतनी कम हो गई कि वाहन चालकों को हेडलाइट और पार्किंग लाइट जलाकर धीमी गति से चलना पड़ा। सुबह के समय सड़क पर सामने से आने वाला वाहन मुश्किल से 30-40 मीटर की दूरी से ही दिख पा रहा था। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट की संभावना है। अधिकतम तापमान 18-20 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 6-8 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने का अनुमान है। हल्की हवा के साथ हवा में नमी की मात्रा बढ़ने से कोहरा देर तक छाया रह सकता है। अगले 2-3 दिनों तक सर्दी से राहत मिलने के आसार कम हैं। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि लगातार कई दिनों तक ठंड और घना कोहरा रबी फसलों पर मिला-जुला असर डाल सकता है। गेहूं की फसल के लिए यह मौसम आमतौर पर फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसे ठंडक और नमी मिलती है, जिससे बालियां भरने और दाने बनने में मदद मिल सकती है। हालांकि, पछेती सरसों, सब्जियों और आलू पर लंबे समय तक कोहरा और धूप की कमी से बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में अधिक सिंचाई न करें, समय पर निराई-गुड़ाई करें और जरूरत पड़ने पर हल्की सिंचाई व सल्फर/सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करें। इधर, कोहरे के कारण सुबह के समय बसें और ट्रेनें भी कुछ देरी से चल रही हैं। पुलिस ने वाहन चालकों से धीमी गति से चलने, लो-बीम हेडलाइट का उपयोग करने और अनावश्यक ओवरटेक से बचने की अपील की है।
हनुमानगढ़ में शनिवार देर रात से घना कोहरा छा गया, जो रविवार सुबह तक बना रहा। शहर और देहात के कई इलाकों में विजिबिलिटी इतनी कम हो गई कि वाहन चालकों को हेडलाइट और पार्किंग लाइट जलाकर धीमी गति से चलना पड़ा। सुबह के समय सड़क पर सामने से आने वाला वाहन मुश
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मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट की संभावना है। अधिकतम तापमान 18-20 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 6-8 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने का अनुमान है। हल्की हवा के साथ हवा में नमी की मात्रा बढ़ने से कोहरा देर तक छाया रह सकता है। अगले 2-3 दिनों तक सर्दी से राहत मिलने के आसार कम हैं।
कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि लगातार कई दिनों तक ठंड और घना कोहरा रबी फसलों पर मिला-जुला असर डाल सकता है। गेहूं की फसल के लिए यह मौसम आमतौर पर फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसे ठंडक और नमी मिलती है, जिससे बालियां भरने और दाने बनने में मदद मिल सकती है।