बंजर जमीन में जीरा-सरसों से लाखों की कमाई:50 गांवों के बीच शुरू की कम खर्च में खेती, ढ़ेंचा लगाकर बढ़ाई उर्वरकता
अत्यधिक उत्पादन की चाह में किसान खेतों में केमिकल और दवाइयों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है। मगर जालोर जिले के अनखोल गांव निवासी युवा किसान धनराज भंवरलाल राजपुरोहित ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने अपनी जमीन का जैविक कार्बन बढ़ाने व खाद के लिए ढेंचा बोया। जैविक कार्बन से जमीन में नमी बनी रहती है। अब वह जीरा-सरसों सहित दूसरी फसलें ले पा रहे हैं। उत्पादन अच्छा हो रहा है और कीटनाशक दवाइयों का खर्चा बिल्कुल नहीं है। ढेंचा से जमीन को उपजाऊ बनाया उन्होंने बताया कि इस वर्ष दो हेक्टेयर में सहजन की खेती भी करूंगा। पिता की प्रेरणा से रसायनमुक्त खेती कर रहा हूं। भूमि क्षारीय के साथ-साथ बंजर होने लगी थी। इसका समाधान ढूंढने पर हरी खाद ढेंचा बोने का निर्णय लिया। मगर बीज नहीं था तो सुमेरपुर मंडी से मंगवाया। पहली बारिश होते ही 1 बीघा में बोया। 2 महीने में इसकी फसल तैयार हो गई। फिर इसे रोटोवेटर से मिट्टी में मिला दिया। इससे यह सड़कर खाद बन गया। इसी जमीन पर रबी में जीरा की बुवाई की। जीरे में न तो कोई रोग लगा और उत्पादन भी ज्यादा मिला। आमतौर पर हमारे क्षेत्र में 1 बीघा में 4-5 बोरी जीरा होता है लेकिन हमारे 9 बोरी हुआ। इससे उम्मीद और बढ़ गई। 50 गांवों में पहली बार प्रयोग दूसरे साल 4 बीघा में ढेंचा बोया। उसमें अभी सरसों बोया हुआ है। इनमें किसी भी प्रकार के रासायनिक का उपयोग नहीं किया जा रहा। आसपास के गांवों के किसानों को भी बताया है कि ढेंचा से खाद बनाकर कम लागत में अच्छी फसल ली जा सकती है। वह 2007 से खेती कर रहा है लेकिन जो रिजल्ट अब आने लगे हैं, वह पहले नहीं थे। किसान इसे अपनाएंगे तो यूरिया डालने की जरूरत नहीं रहेगी। हरी खाद के साथ गोमूत्र का छिड़काव भी कर रहे हैं। आसपास के 50 गांवों में पहली बार इसका प्रयोग किया है। अब दूसरे किसान भी इसे अपनाने लगे हैं। हमारा टोटल खेत 5 हेक्टेयर है। पापा से पूछा कि मुझे यह प्रयोग करके देखना है। पापा ने मेरा साथ दिया। आसपास के खेतों में जीरा बहुत कमजोर था। 2-3 बार पानी देने पर भी उगने में समस्या आ रही थी। मेरे एक ही पानी देने पर बढ़िया उग गया। मेरे इस प्रयोग से गांव के लोग देखने के लिए आने लगे हैं। इन प्रगतिशील किसान से और जानें 99829 09980
