वाहन प्रदूषण पर एनजीटी सख्त, 6 अफसरों को नोटिस जारी किए
भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा प्रदेश में बढ़ते वाहन प्रदूषण और ग्रीन टैक्स के कथित दुरुपयोग को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। सेंट्रल ज़ोन बेंच, भोपाल ने पर्यावरणविद बाबूलाल जाजू की याचिका पर सुनवाई करते हुए परिवहन आयुक्त, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित 6 अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। साथ ही ग्रीन टैक्स की राशि के उपयोग और प्रदूषण नियंत्रण की हकीकत जांचने के लिए संयुक्त जांच समिति का गठन किया गया है। 8 जनवरी को हुई सुनवाई में जस्टिस शिवकुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच के सामने जाजू की ओर से अधिवक्ता लोकेंद्र सिंह कच्छावा ने दलील दी कि प्रदेश में वाहनों से होने वाला प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। इसके चलते दमा, ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव, परिवहन आयुक्त राजस्थान, सदस्य सचिव राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्रमुख सचिव पर्यावरण, प्रमुख सचिव नगरीय विकास और प्रधान मुख्य वन संरक्षक को नोटिस जारी किए हैं। इसके साथ ही पर्यावरण विभाग, परिवहन विभाग, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए संयुक्त जांच समिति बनाई गई है। समिति स्थल निरीक्षण कर छह सप्ताह में रिपोर्ट पेश करेगी। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 को होगी। आठ साल में 2009.66 करोड़ रुपए बतौर ग्रीन टैक्स के रूप में वसूले राजस्थान सरकार ने वर्ष 2017 में प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से ग्रीन टैक्स लागू किया था। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2015-16 से 2024-25 के बीच करीब 2009.66 करोड़ रुपए ग्रीन टैक्स के रूप में वसूले गए, लेकिन यह राशि हरियाली बढ़ाने और वायु प्रदूषण नियंत्रण में खर्च नहीं हुई। आजादी के समय प्रदेश का 13 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित था, जो अब घटकर 9 प्रतिशत रह गया है। वन सघनता भी 0.8 से गिरकर 0.3 रह गई है, ऐसे में ग्रीन टैक्स की रकम का इस्तेमाल हरियाली बढ़ाने में होना चाहिए था। ^यदि ग्रीन टैक्स जैसी बड़ी राशि का सही और पारदर्शी उपयोग होता, तो आज राजस्थान के कई शहर जहरीली हवा से जूझ नहीं रहे होते। ग्रीन टैक्स की रकम का इस्तेमाल केवल प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण पर ही किया जाए। बाबू लाल जाजू, पर्यावरणविद