राजस्थान में 600 से ज्यादा विशाल अजगरों की अनोखी दुनिया:भारत के सबसे बड़े पायथन जोन में भास्कर टीम, कैमरे में कैद की साइलेंट शिकारी की हर मूवमेंट
रणथंभौर-सरिस्का के जंगलों में टाइगर की दहाड़ आपने खूब सुनी होगी। जयपुर के झालाना, नाहरगढ़ और पाली के जवाई में शिकार करते तेंदुओं को भी देखा होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं? राजस्थान में दुनिया के सबसे लंबे सांपों की भी एक रहस्यमयी दुनिया है। ये जगह है वर्ल्ड फेमस केवलादेव घना नेशनल पार्क। यूं तो दुनियाभर के पर्यटक यहां सबसे अनोखे पक्षियों को देखने आते हैं। लेकिन इसी पार्क में 600 से ज्यादा ताकतवर और विशाल अजगर रहते हैं। इस जगह को रॉक पायथन का देश में सबसे बड़ा जोन भी माना जाता है। 'साइलेंट शिकारी' कहे जाने वाले 20 फीट से भी लंबे ये अजगर पलक झपकते ही अपने से कई गुना बड़े जानवर को जकड़ लेते हैं। इनकी फुफकार इतनी खौफनाक होती है कि कोई इनके नजदीक जाने की कोशिश भी नहीं करता। अजगरों की इस दुनिया को कैमरे में कैद करने के लिए भास्कर टीम पायथन जोन में पहुंची। पढ़िए ये रिपोर्ट.... ब्लॉक A से सफर की शुरुआत, वाइब्रेशन सुनते ही बिल की ओर भागा अजगर सुबह के करीब 11 बजे हम केवलादेव नेशनल पार्क के ब्लॉक A में पहुंचे। जंगल के बीचों-बीच पायथन जोन में पर्यटकों के लिए ट्रैक बने हुए हैं। हम उन पर चलते हुए आगे बढ़े तो एक सेही (पॉर्क्युपाइन) का बिल नजर आया। बिल दिखते ही अंदेशा हो गया कि आसपास अजगर जरूर मौजूद होगा। क्योंकि अजगर खुद कभी अपना बिल नहीं बनाते। सेही के बनाए बिलों में ही रहता है। जैसे ही हम आगे बढ़े, पैरों की हल्की सी धमक से एक अजगर की तेजी से भागने की सरसराहट साफ सुनाई दी। हम उसे देख नहीं पाए। लेकिन उसके बिल के पास अंडे का सूखा हुआ खोल मिला। हमारे साथ मौजूद वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट रणधीर ने बताया कि यह जगह अजगर की ब्रीडिंग साइट है। यह नजारे हर पल इस बात का संकेत दे रहे थे कि हम भारत के सबसे सक्रिय पायथन जोन में खड़े हैं। दो घंटे बाद पहला दीदार: झाड़ियों के नीचे धूप सेकता अजगर लगातार खोजबीन के लगभग दो घंटे बाद हमें झाड़ियों के नीचे धूप सेकता एक अजगर दिखाई दिया। उसकी लंबाई करीब 12 से 15 फीट होगी। यह मेल अजगर था और बेहद आक्रामक नजर आ रहा था। जैसे ही हम उसके करीब पहुंचे, उसने जोर से फुफकारना शुरू कर दिया। वह लगातार अपनी पूंछ हिला रहा था, जो इस बात का संकेत था कि वह खतरा महसूस कर रहा है। आमतौर पर अजगर ऐसे हालात में अपने बिल की ओर भागते हैं। लेकिन यह अजगर वहीं बैठा रहा। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट रणधीर ने बताया कि अजगर इंसान के पैरों दी धमक या किसी खतरे की जल्दी पहचान लेता है। ये बेहद शांत होता है और चुपचाप शिकार करना पसंद करता है, इसलिए इसे 'साइलेंट अटैकर' कहा जाता है। यह जो अजगर सामने है, इसका रंग डार्क ब्लैक है। केवलादेव में अजगर कई अलग-अलग रंगों में मिलते हैं। कैनाल के पास दूसरा विशाल अजगर टीम आगे बढ़ी तो करीब 20 मिनट के भीतर केवलादेव कैनाल के पास दूसरा अजगर नजर आया। यह पहले दिखाई दिए अजगर से भी विशाल था। लंबाई करीब 15 फीट होगी। अजगर का रंग थोड़ा हल्का था, लेकिन त्वचा बेहद चमकीली। पानी के पास उसकी मौजूदगी इस बात का संकेत थी कि अजगर और वेटलैंड का रिश्ता कितना गहरा है। पार्क में आगे बढ़ते समय सड़क से थोड़ी दूरी पर एक छोटा अजगर भी नजर आया। वह झाड़ियों के ऊपर धूप सेक रहा था। हालांकि वह पूरी तरह नजर नहीं आया, लेकिन उसके शरीर का जो हिस्सा दिखा, वह बिल्कुल झाड़ियों के रंग में घुला हुआ था। यह कैमोफ्लाज अजगर की सबसे बड़ी ताकत है। दुर्लभ नजारा : नाव से जंगल के भीतर, एक ही बिल में नजर आए 3 अजगर केवलादेव नेशनल पार्क के बीचों-बीच से घना कैनाल गुजरती है। यह पानी का प्रमुख सोर्स भी है। हमें जानकारी मिली कि जंगल के और भीतर कैनाल के आस-पास वेटलैंड एरिया में अजगरों का काफी मूवमेंट रहता है। हमें यही कैप्चर करना था। वहां तक पहुंचने के लिए हमने एक नांव ली। कुछ ही देर बाद हम केवलादेव नेशनल पार्क के बिल्कुल बीच में थे। दूर-दूर तक कोई इंसान नजर नहीं आ रहा था। बिना नांव के यहां पहुंचना बेहद मुश्किल है। सिर्फ पानी के जीव-जंतु, विषैले सांप और अजगर ही रहते हैं। नांव से उतरने के बाद थोड़ी दूरी पर फिर एक बेहद बड़ा सेही का बिल नजर आया। यहां का नजारा हैरान करने वाला था। थोड़ी ही दूरी पर हमें 3 अजगर नजर आए, जो जंगल में छिपकर बैठे हुए थे। हमने उनके बिल के पास जाकर इंतजार किया। कुछ ही देर में पैरों की वाइब्रेशन से पहला अजगर बाहर आया। यह बेहद बड़ा, चमकीला गोल्डन कलर का था। उसने हमें एक पल घूरकर देखा और फिर अपने बिल में रेंगते हुए चला गया। इसकी लंबाई 13 से 15 फीट के करीब होगी। देखने में काफी आक्रामक लग रहा था। लगातार जीभ बाहर निकाल रहा था, जो इस बात का संकेत था कि वह शिकार या बचाव के मूड में है। इसके कुछ देर बाद दूसरा अजगर भी उसी बिल की ओर रेंगता हुआ आया। कैमरा कैप्चर के लिए टीम उसी मोड़ पर बैठ गई। यह अजगर भी देखते ही देखते बिल में चला गया। गाइड ने बताया कि ये अजगर करीब 50 किलो वजन का होगा। 10 मिनट और इंतजार के बाद तीसरा अजगर भी उसी बिल में जाते नजर आया। एक ही बिल में तीन अजगरों को एक साथ जाते देखना बेहद दुर्लभ और रोमांचक अनुभव था। इस क्षेत्र की शांति और दुर्गमता की वजह से ही ऐसा नजारा देखने को मिलता है। सेही, लकड़बग्घा और अजगर, तीनों का एक ही घर कैनाल से ही बोट के जरिए वापसी के दौरान कई अजगर एक साथ धूप सेकते नजर आए। ये नजारे देखकर ऐसा लगता है, मानो घना की जमीन पर इन्हीं का राज है। नेचुरलिस्ट रणधीर बताते हैं कि अजगर सेही के बनाए बिलों को ही अपना घर बनाते हैं। बिल के अलग-अलग हिस्सों में अजगर, सेही और लकड़बग्घा एक साथ रहते हैं। कई बार इन तीनों के बीच आवास को लेकर झड़पें भी हो जाती हैं। केवलादेव को माना जाता है रॉक पायथन का सबसे बड़ा घर नेचुरलिस्ट नरेन्द्र शर्मा ने बताया कि केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान में 600 से ज्यादा अजगर मौजूद हैं। हर साल औसतन 200 अजगरों का रेस्क्यू किया जाता है। यहां निवास करने वाले अजगर की लंबाई 18 से 22 फीट तक होती है। इनकी औसत उम्र 16 साल होती है। केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में अजगरों की मौजूदगी पर वन्यजीव विशेषज्ञ सुब्रमण्यम भूपति ने रिसर्च की थी। इस रिसर्च में सामने आया कि घना में पूरे भारत के लिहाज से सर्वाधिक संख्या में अजगर (रॉक पायथन) मौजूद हैं। रिसर्च के दौरान यहां पर 135 अजगरों की मौजूदगी पाई गई थी, लेकिन घना में इनकी असल आबादी कहीं ज्यादा है। यही कारण है कि घना को रॉक पायथन का भारत में सबसे बड़ा पॉइंट माना जाता है। यहां के गाइड गजेंद्र सिंह ने बताया कि सर्दियों और धूप वाले दिनों में अजगर ज्यादा एक्टिव रहते हैं, इसी वजह से इस समय उनकी साइटिंग बढ़ जाती है। केवलादेव का वेटलैंड और घनी झाड़ियां अजगर के लिए आदर्श प्राकृतिक आवास हैं। यहां उन्हें पर्याप्त पानी, शिकार और छुपने की जगह मिलती है। कई टूरिस्ट खासतौर से अजगर देखने ही यहां पर आते हैं। विदेशी टूरिस्ट में इनका ज्यादा क्रेज रहता है। पर्यटक बोले- पक्षी देखने आए थे, पायथन देखकर हैरान चेन्नई से आए पर्यटक शिवाय ने बताया- ‘हम यहां पक्षी देखने आए थे, लेकिन हमें बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि केवलादेव में इतना बड़ा पायथन पॉइंट भी है। यह मेरा पहला अनुभव है जब मैंने अजगर को इतने पास से देखा। यह अनुभव वाकई बहुत रोमांचक और यादगार रहा।’ शाविन ने बताया- मैंने पहली बार अजगर को मूवमेंट करते हुए देखा। मैं उसका चेहरा देखना चाहता था, लेकिन वह ज़्यादा हिल नहीं रहा था, इसलिए साफ़ दिखाई नहीं दिया। हमने काफी देर तक उसका इंतजार किया। वह बेहद खतरनाक लग रहा था, लेकिन उसे देखना बहुत रोमांचक था। अब मैं अपने दोस्तों को भी इस अनुभव के बारे में जरूर बताऊंगा।' अजगर की मौजूदगी को लेकर कई कहानियां भी केवलादेव के अंदर ई-रिक्शा चलाने वाले जितेंद्र बताते हैं कि यहां मान्यता के अनुसार भरतपुर के पास के एक गांव से श्रीकृष्ण को मारने एक राक्षस अजगर बनकर गया था, जिसे श्रीकृष्ण ने मार दिया। तभी से इस इलाके में अजगरों की संख्या ज्यादा मानी जाती है। पायथन सेंचुरी के तौर पर विकसित करने का विचार उपवन संरक्षक चेतन कुमार बी.वी. ने बताया कि केवलादेव नेशनल पार्क में पायथन पॉइंट एक प्रमुख आकर्षण बन चुका है। यहां अजगरों की साइटिंग बहुत अच्छी रहती है। इन पर काफी रिसर्च किया गया है और इनकी संख्या भी यहां अच्छी खासी है। भरतपुर और आसपास के क्षेत्रों में जहां भी अजगर रेस्क्यू किए जाते हैं, उन्हें सुरक्षित रूप से केवलादेव नेशनल पार्क में ही छोड़ा जाता है, इसी वजह से यहां इनकी संख्या अधिक है। .... भास्कर की स्पेशल स्टोरीज से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए... अब पैलेस ऑन व्हील्स में शादी भी होंगी:सबसे लग्जरी ट्रेन में 21 लाख किराये का शाही कमरा; कांच और सोने के महल जैसे रेस्टोरेंट जयपुर के दुर्गापुरा स्टेशन पर खड़ी पैलेस ऑन व्हील्स ट्रेन दूर से नजर आ जाती है। कोच का रंग, डिजाइन और भव्यता देखकर समझ आ जाता है कि ये आम ट्रेन नहीं है। पूरी खबर पढ़िए...












