किसान संगठनों की महापंचायत 7 जनवरी को संगरिया में:एथेनॉल फैक्ट्री एमओयू रद्द करने, मुकदमे वापस लेने की मांग
हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में किसान संगठनों ने 7 जनवरी को संगरिया में महापंचायत का ऐलान किया है। किसान नेताओं ने शुक्रवार को जंक्शन स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा के दौरान यह जानकारी दी। माकपा नेता मंगेज चौधरी ने बताया कि राठीखेड़ा की एथेनॉल फैक्ट्री का एमओयू रद्द होने के लिखित आदेश जारी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अभी तक सिर्फ मौखिक चर्चा है कि कंपनी पीछे हट गई है, लेकिन किसानों को कोई लिखित आदेश नहीं मिला है, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है। चौधरी ने स्पष्ट किया कि टिब्बी में हुई घटना के बाद किसानों के खिलाफ दर्ज मुकदमे रद्द होने तक भी आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और किसानों के बीच झड़प के बाद प्रशासन ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए किसानों पर मामले दर्ज किए। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार ने 20 दिन की समय सीमा में समाधान का भरोसा दिया था। हालांकि, न तो फैक्ट्री के संबंध में कोई स्पष्ट निर्णय आया और न ही केस वापसी को लेकर कोई प्रगति दिखी। बातचीत की प्रक्रिया भी बीच में ही छोड़ दी गई। किसान नेताओं ने दोहराया कि संगरिया की महापंचायत हर हाल में होगी। यदि 7 जनवरी से पहले सरकार लिखित आदेश जारी भी कर देती है, तब भी महापंचायत में आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो एसडीएम कार्यालय का घेराव, स्थायी धरना या बड़े चक्का जाम जैसे फैसले महापंचायत मंच से लिए जा सकते हैं। इस दौरान किसान नेता रेशम सिंह माणुका, माकपा नेता रघुवीर वर्मा, विजय कौशिक और विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में किसान संगठनों ने 7 जनवरी को संगरिया में महापंचायत का ऐलान किया।
हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में किसान संगठनों ने 7 जनवरी को संगरिया में महापंचायत का ऐलान किया है। किसान नेताओं ने शुक्रवार को जंक्शन स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा के दौरान यह जानकारी दी।
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माकपा नेता मंगेज चौधरी ने बताया कि राठीखेड़ा की एथेनॉल फैक्ट्री का एमओयू रद्द होने के लिखित आदेश जारी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अभी तक सिर्फ मौखिक चर्चा है कि कंपनी पीछे हट गई है, लेकिन किसानों को कोई लिखित आदेश नहीं मिला है, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
चौधरी ने स्पष्ट किया कि टिब्बी में हुई घटना के बाद किसानों के खिलाफ दर्ज मुकदमे रद्द होने तक भी आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और किसानों के बीच झड़प के बाद प्रशासन ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए किसानों पर मामले दर्ज किए।