बराणा का किसान 8 साल से पॉलीहाउस में कर रहा खेती, 1 बेटा बीटेक, दूसरा एमसीए
फतहलाल शर्मा| भीलवाड़ा जिले में करीब 10 साल पहले शुरू हुई पॉलीहाउस और शेडनेट खेती ने किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है। पहले साधारण खेती से सालाना 80–90 हजार रुपए ही आमदनी होती थी, लेकिन पॉलीहाउस व शेडनेट में खीरा, शिमला मिर्च और डचरोज की खेती से यह बढ़कर 9–10 गुना यानी करीब 10 लाख रुपए तक पहुंच गई। इस बदलाव का असर केवल आर्थिक स्थिति तक सीमित नहीं रहा। किसान अब अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पा रहे हैं। कृषि कार्यों के लिए ट्रैक्टर और उपकरण खरीदे गए हैं। पारिवारिक भ्रमण के लिए लग्जरी वाहन भी उपलब्ध हैं। पॉलीहाउस से पहले जिन किसानों के बच्चों की सगाई नहीं हो रही थी, उनकी भी आर्थिक स्थिति सुधरने पर शादी संभव हुई। वर्तमान में जिले में 270 पॉलीहाउस और 41 शेडनेट में खीरा, शिमला मिर्च और गुलाब की खेती हो रही है। भीलवाड़ा का खीरा जयपुर, पंजाब, गुजरात, दिल्ली सहित अन्य प्रदेशों में बिक्री के लिए भेजा जा रहा है। सरकार ने अब पॉलीहाउस और शेडनेट का क्षेत्रफल घटाकर 2500 वर्ग मीटर कर दिया है, जिससे 54 किसानों को लाभ मिलेगा। दिलचस्प बात यह है कि कई बीटेक, बीसीए जैसे उच्च शिक्षा प्राप्त किसान भी पॉलीहाउस में खेती कर रहे हैं। सरकार द्वारा अनुदान और तकनीकी सहायता मिलने से किसानों में खेती के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है और यह मॉडल पूरे जिले में अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है। पॉलीहाउस में खीरा व शिमला मिर्च की खेती से होने वाली आय के चलते बीगोद के बी टेक भाइयों ने नौकरी के बजाय खेती को महत्व दिया। कंम्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करने वाले आशुतोष पारीक बताते हैं कि उनके पिता महेश पारीक पांच भाई है। पांचों भाइयों के करीब 20 पॉलीहाउस है। आशुतोष बताते हैं कि उनके स्वयं के 8 पॉलीहाउस है। प्रति पॉलीहाउस से सालाना 8 से 10 लाख रुपए इनकम होती है। पॉलीहाउस में तैयार खीरा व शिमला मिर्च दिल्ली और पंजाब भेजी जा रही है। उनके काका आदि के बेटे भी इंजीनियर है, जो भी नौकरी के बजाय खेती कर रहे हैं। उनके पास दो घोड़ी व थारपारकर नस्ल की 30 गायें हैं। गायें 15 लीटर दूध देती है। दूध बेचने के बजाय बछड़ों को ही पिलाते है। नौकरी छोड़ खेती . 20 पॉली हाउस से 1.50 करोड आमदनी वर्तमान में जिले में करीब 270 पॉली हाउस व 41 शेडनेट में खीरा, शिमला मिर्च और डचरोज की खेती हो रही है। उद्यान विभाग के उप निदेशक डॉ. शंकरसिंह राठौड़ के अनुसार 270 पॉलीहाउस 8.54 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में हैं, जबकि 1.42 वर्ग मीटर क्षेत्र में 41 शेडनेट बने हुए हैं। पॉलीहाउस के लिए 1823 और शेडनेट के लिए 750 किसानों ने आवेदन कर रखे हैं। इसमें से 50 प्रतिशत टारगेट पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर पूरा किया जाएगा। शेष 50 प्रतिशत के लिए जयपुर स्थित उद्यान आयुक्तालय से लॉटरी से किसानों का चयन किया जाएगा।