शिक्षा विभाग की 8 करोड़ की 590 मशीनें बेकार, 70 लाख स्कूली बच्चों का आधार अपडेटशन अटका
प्रदेश में शिक्षा विभाग 8 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी चार साल से बच्चों का आधार अपडेट नहीं करा पाया है। नतीजा यह कि 1.56 करोड़ विद्यार्थियों में से 70 लाख बच्चों का आधार आज भी अधर में लटका है। आधार अपडेट नहीं होने से छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। यूनिफॉर्म, साइकिल, लैपटॉप और टैबलेट जैसी सुविधाएं भी प्रभावित हो रही हैं। जयपुर समेत प्रदेश में आधार अपडेशन की मशीनें सीबीईओ दफ्तरों में धूल फांक रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि आधार अपडेट के लिए लाई गईं 100 से ज्यादा मशीनें बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में भेज दी गईं, जिन्हें विभाग दो साल बाद भी रिकवर नहीं कर पाया। जबकि नियम है कि 5 साल की उम्र के बाद बच्चे का आधार अपडेट कराना अनिवार्य है। चार साल पहले शिक्षा विभाग ने बच्चों के आधार बनाने और अपडेट करने का ठेका एक निजी एजेंसी को दिया। केंद्र सरकार से मिले 8 करोड़ रुपए के फंड से करीब 590 मशीनें (लैपटॉप, थंब स्कैनर आदि) खरीदी गईं। काम शुरू होते ही खुलासा हुआ कि इन्हीं मशीनों से बिहार, एमपी और अन्य राज्यों में आधार बनाए जा रहे हैं। इसके बाद मशीनें बंद कर दी गईं और एजेंसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। हालात यह हैं कि आज भी 100 से ज्यादा मशीनें विभाग के पास वापस नहीं आईं, और जो मशीनें बची हैं, उन्हें चलाने की व्यवस्था ही नहीं बन पाई। प्राइमरी से 12वीं तक 1.56 करोड़ बच्चे, 84% के पास ही आधार
प्रदेश में शिक्षा विभाग 8 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी चार साल से बच्चों का आधार अपडेट नहीं करा पाया है। नतीजा यह कि 1.56 करोड़ विद्यार्थियों में से 70 लाख बच्चों का आधार आज भी अधर में लटका है। आधार अपडेट नहीं होने से छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी योज
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- 100 मशीनें दूसरे राज्यों में, दो साल से रिकवरी नहीं
जयपुर समेत प्रदेश में आधार अपडेशन की मशीनें सीबीईओ दफ्तरों में धूल फांक रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि आधार अपडेट के लिए लाई गईं 100 से ज्यादा मशीनें बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में भेज दी गईं, जिन्हें विभाग दो साल बाद भी रिकवर नहीं कर पाया। जबकि नियम है कि 5 साल की उम्र के बाद बच्चे का आधार अपडेट कराना अनिवार्य है।
चार साल पहले शिक्षा विभाग ने बच्चों के आधार बनाने और अपडेट करने का ठेका एक निजी एजेंसी को दिया। केंद्र सरकार से मिले 8 करोड़ रुपए के फंड से करीब 590 मशीनें (लैपटॉप, थंब स्कैनर आदि) खरीदी गईं। काम शुरू होते ही खुलासा हुआ कि इन्हीं मशीनों से बिहार, एमपी और अन्य राज्यों में आधार बनाए जा रहे हैं। इसके बाद मशीनें बंद कर दी गईं और एजेंसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। हालात यह हैं कि आज भी 100 से ज्यादा मशीनें विभाग के पास वापस नहीं आईं, और जो मशीनें बची हैं, उन्हें चलाने की व्यवस्था ही नहीं बन पाई।