अपराधों की संख्या में कमी:प्रदेश में बीते साल मुकदमों की संख्या में 8.4% की गिरावट, दो जिलों में दो हजार से कम केस
राज्य में 2024 की तुलना में 2025 में अपराधों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में एफआईआर की संख्या में 8.4% गिरावट रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में जहां कुल 2.97 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए थे। जबकि बीते वर्ष में यह संख्या घटकर 272621 हो गई। करीब 25 हजार मामले कम दर्ज किए गए। यह गिरावट प्रदेश की कानून व्यवस्था और पुलिसिंग के लिए राहत वाली है। प्रदेश के एक दर्जन जिलों में एक तरह से शांति का माहौल है। इनमें से फलोदी, सलुंबर जैसे जिलों में तो दो–दो हजार मामले भी दर्ज नहीं हुए हैं। इन जिलों सहित एक दर्जन जिलों में कानून व्यवस्था संतोषजनक श्रेणी में है। यहां एक हजार से लेकर पांच हजार तक मुकदमे दर्ज किए गए हैं। जबकि छह बड़े जिलों व शहरों की स्थिति चिंताजनक है। यहां दस हजार से लेकर 38 हजार से भी ज्यादा लोग पुलिस थाने पहुंचे। इनमें सर्वाधिक संख्या जयपुर की 38959 रही है। जयपुर शहर कुल मामलों की संख्या में राज्य में शीर्ष पर है, मगर 2024 के आंकड़ों से लगभग 10% की कमी आई है। सलुंबर व फलोदी दो ऐसे जिले हैं, जहां सबसे कम 1613 तथा 1721 मुकदमे दर्ज किए गए। इसी तरह खैरथल-तिजारा 2365, डीडवाना-कुचामन 3264, बाड़मेर 3330, प्रतापगढ़ 3489, सिरोही 3821, जालोर 3878, राजसमंद 4142, नागौर 4156, ब्यावर 4757 और बांसवाड़ा 4861 मुकदमों के साथ उन जिलों में है, जहां पांच हजार से कम केस हुए। जबकि सवाई माधोपुर 5005, डीग 5058, चूरू 5153, बूंदी 5163, कोटपूतली-बहरोड़ 5363, चित्तौड़गढ़ 6012, पाली 6039, धौलपुर 6340, दौसा 6679, टोंक 6927, हनुमानगढ़ 7675, बीकानेर 8119, श्री गंगानगर 9490, सीकर 9637 एफआईआर के साथ मध्यम श्रेणी में है। यहां पांच से दस हजार के बीच केस रजिस्टर्ड हुए हैं। छह बड़े शहरों में उदयपुर में 10973, कोटा में 11005, अजमेर में 11009, जोधपुर में 12433, अलवर में 14685 व जयपुर में 38959 एफआईआर हुई हैं। रैंक में टॉप पर मगर अपराधों में गिरावट सबसे कम जिला स्तर पर सलुंबर की एक नंबर रैंक है। मगर यहां 0.7 प्रतिशत केस में कमी आई । जालोर दूसरे नंबर पर है। यहां भी 0.8% की गिरावट रही। पाली और फलोदी की 3 व 4 रैंक है। यहां केस रजिस्ट्रेशन में 2.4% की कमी आई। जबकि जयपुर की रैंक 32 है। मगर यहां 10 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई। अलवर में 10.7%, भरतपुर में 12.0%, भीलवाड़ा में 13.1% और सर्वाधिक 15 प्रतिशत से ज्यादा की कमी जैसलमेर जिले में आई है। जैसलमेर की रैंक निचले स्तर पर है।