प्रदेश में कैंसर का सबसे बेहतर इलाज जयपुर में:90 हजार मरीजों की सालाना ओपीडी स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में...800 किलोमीटर दूर से भी आ रहे, कई दिनों का ठहराव भी
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को अच्छी सुविधाओं और इलाज को देखते हुए उम्मीद जयपुर से है। स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में सालाना 90 हजार रोगियों की ओपीडी है। बाड़मेर, जैसलमेर, बांसवाड़ा से लेकर पड़ोसी राज्यों के मरीज भी यहां आ रहे। एसएमएस के कैंसर सेंटर की ओपीडी 50 हजार है। जिला हॉस्पिटलों में आज भी सुविधाओं, संसाधनों की दरकार है। मरीजों के परिजनों का दर्द है कि ज्यादातर रोगी लंबे सफर के चलते ही टूट जाते हैं। कैंसर इंस्टीट्यूट और एसएमएस कैंसर सेंटर पर भास्कर को ऐसे कई रोगी मिले जो 800 किमी दूर से आए थे। उनका कहना है कि सरकार को जिला हास्पिटलों को कैंसर के लिहाज से अपग्रेड करना चाहिए। स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के सुपरिंटेंडेंट डॉ. संदीप जसूजा का कहना है कि यहां मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में प्रदेश में लगातार कैंसर सेंटरों का अपग्रेडेशन होना चाहिए। प्राइवेट हॉस्पिटल का इलाज अफोर्ड करना ज्यादातर के लिए आसान नहीं है। 10 हजार एंबुलेंस किराया, भादरा से पत्नी को लेकर पहुंचे सुरेंद्र कैंसर इंस्टीट्यूट में पत्नी को व्हील चेयर पर ले जा रहे सुरेंद्र भादरा से आए हैं। बोले-10 हजार एंबुलेंस का किराया दिया है। दो साल पहले पत्नी को कैंसर डाइग्नोस हुआ। मरीज का ट्रेन, बस में इतना सफर कराना जानलेवा है। ऐसे में बार-बार एंबुलेंस का इतना किराया देना एक खेतीहर व्यक्ति के लिए बहुत मुश्किल है। सरकार को कैंसर के लिए जिला हॉसपिटल में सुविधाएं बढ़ानी चाहिए। धंधा बंद हो गया...पिता का डेढ़ महीने से करा रहा इलाज धौलपुर से मरीज पिता को लेकर आए हैं लोकेंद्र। करीब डेढ़ माह से यही पर हैं। रहने-खाने का इंतजात ठीकठाक है,लेकिन मानसिक रूप से परिवार को तोडृ दिया है इस बीमारी ने। बेटे ने बताया कि पिता और वे साथ मिलकर टेलरिंग का काम करते थे। अब धंधा बंद हो गया। पूरा परिवार भी परेशान। दूरी के चलते यहां बार-बार आना जाना भी आसान नहीं रहता जबकि हमारे यहां पर सुविधाएं भी इतनी बेहतर नहीं है। अपने इलाके में इलाज ऐसा मिले तो रेफर की जरूरत ना पड़े व्हीलचेयर पर ओपीडी कतार में खड़े ताज मोहम्मद भतीजे कालू के साथ एक माह से इलाज करा रहे हैं। नोखा से हैं। कालू ने बताया कि पीबीएम में इलाज चला, लेकिन जिन कैंसर के इस स्टेज पर जिन दवाओं और सुविधाओं की जरूरत है वो यही उपलब्ध है। हमारे जैसे गरीबों के लिए जयपुर में रहकर इलाज कराना आसान नहीं है। ऐसे में सरकारी स्तर पर सुविधाओं का विस्तार होना चाहिए।