प्रमोशन के बाद भी एक्सईएन पद पर नियुक्ति नहीं:पदोन्नति फिर भी AEN का काम, वेतन XEN का; कई के पास दो से तीन जोन
जेडीए में प्रमोशन के बावजूद इंजीनियरों को एक्सईएन पद पर नियुक्ति नहीं दी जा रही। हालात यह हैं कि एक साल पहले एईएन से एक्सईएन पद पर प्रमोट हुए इंजीनियर अभी भी एईएन का काम कर रहे हैं, जबकि वेतन एक्सईएन का ले रहे हैं। इससे न केवल जेडीए को आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि कार्य व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। दूसरी ओर, जेडीए में कई एक्सईएन के पास दो से तीन जोन की जिम्मेदारी है। इन अधिकारियों से काम संभल नहीं पा रहा, जिसका सीधा असर सड़कों की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। इसके बावजूद प्रमोट हुए एईएन को एक्सईएन पद पर नई नियुक्ति नहीं दी जा रही है। स्थिति यह भी है कि डीएलबी से आए इंजीनियर जेडीए में कार्यरत हैं, जबकि इनके लिए जेडीए में स्वीकृत पद नहीं है। इनकी जगह प्रमोट हुए इंजीनियरों को नियुक्ति दी जानी चाहिए थी। एक ही जोन में तीन साल से जमे कई इंजीनियर करीब एक दर्जन एक्सईएन एक ही जोन में लंबे समय से जमे हैं। जेडीए अधिकारी इनका जोन परिवर्तन में भी विफल हैं। प्रदीप चौधरी, राकेश कुमार, प्रवीण मीना और कैलाश जांगिड़ का एक साल पहले एईएन से एक्सईएन पद पर प्रमोशन हो चुका है, लेकिन अब तक एक्सईएन की जिम्मेदारी नहीं सौंपी। एक्सईएन रिचा गुप्ता जेईएन से एक्सईएन पद पर प्रमोट हो चुकी हैं, लेकिन उनकी सीट अब तक नहीं बदली गई है। वहीं जेईएन दीपक शर्मा पीआरएन नॉर्थ में, जेईएन वरुण अग्निहोत्री जोन-11 में और एईएन जितेंद्र मीना जोन-6 में तीन साल से तैनात हैं। इनमें से कई इंजीनियरों के खिलाफ घटिया सड़क निर्माण की शिकायतें जेडीए अधिकारियों को मिल चुकी हैं, इसके बावजूद उच्च अधिकारी इन पर मेहरबान बने हुए हैं।
जेडीए में प्रमोशन के बावजूद इंजीनियरों को एक्सईएन पद पर नियुक्ति नहीं दी जा रही। हालात यह हैं कि एक साल पहले एईएन से एक्सईएन पद पर प्रमोट हुए इंजीनियर अभी भी एईएन का काम कर रहे हैं, जबकि वेतन एक्सईएन का ले रहे हैं। इससे न केवल जेडीए को आर्थिक नुकसान
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दूसरी ओर, जेडीए में कई एक्सईएन के पास दो से तीन जोन की जिम्मेदारी है। इन अधिकारियों से काम संभल नहीं पा रहा, जिसका सीधा असर सड़कों की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। इसके बावजूद प्रमोट हुए एईएन को एक्सईएन पद पर नई नियुक्ति नहीं दी जा रही है। स्थिति यह भी है कि डीएलबी से आए इंजीनियर जेडीए में कार्यरत हैं, जबकि इनके लिए जेडीए में स्वीकृत पद नहीं है। इनकी जगह प्रमोट हुए इंजीनियरों को नियुक्ति दी जानी चाहिए थी।
एक ही जोन में तीन साल से जमे कई इंजीनियर