काडियक सेंटर; हाईब्रिड कैथलैब:AI बेस्ड ओसीटी आईवस से होगी एंजियोप्लास्टी
एसएमएस में बन रहे कार्डियक सेंटर में दिल के मरीजों को हाईब्रिड कैथलैब और एआई बेस्ड टेक्नोलॉजी से इलाज मिलेगा। बांगड़ में चल रही कैथलैब और कार्डियक वार्ड भी नई बिल्डिंग में शिफ्ट हो जाएंगे। एंजियोजेट मशीन मरीजों के पांव की नसों में खून का थक्का बन जाता है और हार्ट, फेफड़ों की नसों में जाने का खतरा होता है, उनका इलाज करेगी। एआई बेस्ड ओसीटी एआई बेस्ड ऑप्टिकल कोहरेंस टोमोग्राफी इमेजिंग (ओसीटी) और इंट्रावस्कुलर अल्ट्रासाउंड (आईवस) टेक्नोलॉजी ला रहे हैं। कैमरे की मदद से कॉम्प्लेक्स एंजियोप्लास्टी होगी। थ्रीडी मैपिंग इंस्टिट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी के नोडल ऑफिसर डॉ. दिनेश गौतम ने बताया कि एसएमएस पहला सरकारी अस्पताल होगा, जहां थ्रीडी मैपिंग से अनियंत्रित धड़कन वाले मरीज का इलाज किया जाएगा। इससे सटीक पॉजिशन पता लगेगी।
एसएमएस में बन रहे कार्डियक सेंटर में दिल के मरीजों को हाईब्रिड कैथलैब और एआई बेस्ड टेक्नोलॉजी से इलाज मिलेगा। बांगड़ में चल रही कैथलैब और कार्डियक वार्ड भी नई बिल्डिंग में शिफ्ट हो जाएंगे।
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एंजियोजेट मशीन
मरीजों के पांव की नसों में खून का थक्का बन जाता है और हार्ट, फेफड़ों की नसों में जाने का खतरा होता है, उनका इलाज करेगी।
एआई बेस्ड ओसीटी
एआई बेस्ड ऑप्टिकल कोहरेंस टोमोग्राफी इमेजिंग (ओसीटी) और इंट्रावस्कुलर अल्ट्रासाउंड (आईवस) टेक्नोलॉजी ला रहे हैं। कैमरे की मदद से कॉम्प्लेक्स एंजियोप्लास्टी होगी।
थ्रीडी मैपिंग
इंस्टिट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी के नोडल ऑफिसर डॉ. दिनेश गौतम ने बताया कि एसएमएस पहला सरकारी अस्पताल होगा, जहां थ्रीडी मैपिंग से अनियंत्रित धड़कन वाले मरीज का इलाज किया जाएगा। इससे सटीक पॉजिशन पता लगेगी।