झुंझुनूं में AI से होगी कैदियों की TB जांच:सस्पेक्ट मिलते ही होगा बलगम टेस्ट, हर ब्लॉक में जाएगी मशीन
प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत अब उन जगहों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां संक्रमण फैलने का खतरा अधिक होता है। इसी कड़ी में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम जिला जेल पहुंची और सभी कैदियों की टीबी की जांच की। इस शिविर की खास बात यह रही कि इसके लिए कैदियों को कहीं बाहर ले जाने की जरूरत नहीं पड़ी, बल्कि अत्याधुनिक हैंड-हेल्ड (हाथ में पकड़ी जाने वाली) एक्स-रे मशीन से जेल के अंदर ही सबकी जांच पूरी कर ली गई। एआई (AI) तकनीक से बीमार की पहचान जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विजयसिंह ने बताया कि विभाग अब टीबी की पहचान के लिए नई तकनीक का सहारा ले रहा है। जेल में सभी कैदियों का एक्स-रे किया गया है। अब इस मशीन की एआई रिपोर्ट देखी जाएगी। अगर किसी कैदी की रिपोर्ट में टीबी के लक्षण (सस्पेक्ट) मिलते हैं, तो तुरंत उसके बलगम की जांच करवाई जाएगी। इससे बीमारी को शुरुआती चरण में ही पकड़ना आसान हो जाएगा। हर ब्लॉक में भेजी जाएगी मशीन डॉ. विजयसिंह ने जानकारी दी कि यह पोर्टेबल मशीन जिले के हर ब्लॉक में सात-सात दिनों के लिए भेजी जाएगी। उन्होंने बताया यह मशीन उन छोटे स्वास्थ्य केंद्रों के लिए वरदान है जहां एक्स-रे की पक्की मशीन नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों और गरीब बस्तियों में रहने वाले लोगों की स्क्रीनिंग के लिए भी इसी तरह के शिविर लगाए जाएंगे। इससे टीबी के मरीजों को खोजने के काम में तेजी आएगी। मौके पर ही डिजिटल एक्स-रे जेल उप अधीक्षक गंगाराम ने कहा कि कैदियों के स्वास्थ्य के लिए समय-समय पर शिविर तो लगते हैं, लेकिन हर एक कैदी का मौके पर ही डिजिटल एक्स-रे हो जाना एक बड़ी सुविधा है। शिविर को सफल बनाने में सहायक रेडियोग्राफर राजेश सैनी, एसटीएलएस बबीता कुमारी, लैब असिस्टेंट नरेंद्र कुमार, बीएचएस रवीन्द्रसिंह और एएनएम कमलेश ने अपनी सेवाएं दीं। टीम ने कैदियों को टीबी के लक्षणों और इससे बचाव के तरीकों के बारे में भी जानकारी दी।
प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत अब उन जगहों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां संक्रमण फैलने का खतरा अधिक होता है। इसी कड़ी में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम जिला जेल पहुंची और सभी कैदियों की टीबी की जांच की। इस शिविर की खास बात यह रही कि इसके लिए कैदियों को कहीं बाहर ले जाने की जरूरत नहीं पड़ी, बल्कि अत्याधुनिक हैंड-हेल्ड (हाथ में पकड़ी जाने वाली) एक्स-रे मशीन से जेल के अंदर ही सबकी जांच पूरी कर ली गई। एआई (AI) तकनीक से बीमार की पहचान जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विजयसिंह ने बताया कि विभाग अब टीबी की पहचान के लिए नई तकनीक का सहारा ले रहा है। जेल में सभी कैदियों का एक्स-रे किया गया है। अब इस मशीन की एआई रिपोर्ट देखी जाएगी। अगर किसी कैदी की रिपोर्ट में टीबी के लक्षण (सस्पेक्ट) मिलते हैं, तो तुरंत उसके बलगम की जांच करवाई जाएगी। इससे बीमारी को शुरुआती चरण में ही पकड़ना आसान हो जाएगा। डॉ. विजयसिंह ने जानकारी दी कि यह पोर्टेबल मशीन जिले के हर ब्लॉक में सात-सात दिनों के लिए भेजी जाएगी। उन्होंने बताया यह मशीन उन छोटे स्वास्थ्य केंद्रों के लिए वरदान है जहाँ एक्स-रे की पक्की मशीन नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों और गरीब बस्तियों में रहने वाले लोगों की स्क्रीनिंग के लिए भी इसी तरह के शिविर लगाए जाएंगे।इससे टीबी के मरीजों को खोजने के काम में तेजी आएगी। जेल उपा अधीक्षक गंगाराम ने कहा कि कैदियों के स्वास्थ्य के लिए समय-समय पर शिविर तो लगते हैं, लेकिन हर एक कैदी का मौके पर ही डिजिटल एक्स-रे हो जाना एक बड़ी सुविधा है। शिविर को सफल बनाने में सहायक रेडियोग्राफर राजेश सैनी, एसटीएलएस बबीता कुमारी, लैब असिस्टेंट नरेंद्र कुमार, बीएचएस रवीन्द्रसिंह और एएनएम कमलेश ने अपनी सेवाएं दीं। टीम ने कैदियों को टीबी के लक्षणों और इससे बचाव के तरीकों के बारे में भी जानकारी दी।