झुंझुनूं DST के तीन जवानों को गैलेंट्री अवार्ड मिला:इनाम के साथ प्रमोशन, कांस्टेबल से हेड-कांस्टेबल बने
झुंझुनूं जिले की जिला स्पेशल टीम के तीन जवानों को गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। गंभीर आपराधिक मामलों में कार्रवाई, अंतरराज्यीय स्तर पर आरोपियों की गिरफ्तारी और लंबित केसों के खुलासे में भूमिका निभाने वाले इन जवानों को डीजीपी के आदेश पर कॉन्स्टेबल से हेड कॉन्स्टेबल पद पर पदोन्नत भी किया गया है। पुलिस विभाग ने इसे कार्य निष्पादन के आधार पर दिया गया सम्मान बताया है। गैलेंट्री अवार्ड और पदोन्नति का आदेश जिला स्पेशल टीम के जवान अंकित ओला, बुलेश कुमार और हरीश बलवदा को पुलिस मुख्यालय की ओर से गैलेंट्री अवॉर्ड दिया गया है। पुलिस विभाग के अनुसार तीनों को यह सम्मान उनके कार्य प्रदर्शन के आधार पर दिया गया। डीजीपी के आदेश के बाद तीनों को कॉन्स्टेबल से हेड कॉन्स्टेबल पद पर पदोन्नत किया गया है। जिले के साथ अन्य राज्यों में भी की कार्रवाई DST के इन जवानों ने जिले में दर्ज मामलों के साथ अन्य राज्यों में फरार आरोपियों की तलाश कर गिरफ्तारी की। चोरी, रंगदारी, डकैती और हत्या जैसे मामलों में इनकी भूमिका जांच के दौरान महत्वपूर्ण रही। कई मामलों में आरोपी राज्य से बाहर छिपे हुए थे, जिन्हें पकड़ने के लिए टीम ने अन्य राज्यों में जाकर कार्रवाई की। अंकित ओला की भूमिका अंकित ओला ने नयासर क्षेत्र में हुई 60 लाख रुपए की चोरी के मामले का खुलासा किया। इसके साथ ही गुढ़ागौड़जी क्षेत्र में एक व्यापारी से 50 लाख रुपए की रंगदारी मांगने के मामले में आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी में उनकी भूमिका रही। बुलेश कुमार की कार्रवाई बुलेश कुमार ने चिड़ावा के पेड़ा व्यवसायी से 1 करोड़ रुपए की फिरौती मांगने वाले गिरोह को आंध्र प्रदेश से गिरफ्तार करने में योगदान दिया। इसके अलावा पचेरी क्षेत्र में दो साधुओं की हत्या से जुड़े मामले में यूपी से आरोपियों को पकड़ने की कार्रवाई में भी वे शामिल रहे। हरीश बलवदा का योगदान हरीश बलवदा ने सेना अधिकारी के घर डकैती की वारदात में शामिल गिरोह को पंजाब में पाकिस्तान सीमा के पास से गिरफ्तार करने में भूमिका निभाई। चिड़ावा क्षेत्र में दर्ज रंगदारी के मामले में भी जांच के दौरान उनकी जिम्मेदारी अहम रही। विभाग का पक्ष पुलिस मुख्यालय की ओर से बताया गया कि गैलेंट्री अवार्ड और पदोन्नति कार्य निष्पादन के आधार पर दी गई है। विभाग का मानना है कि इस तरह की मान्यता से पुलिस बल में जिम्मेदारी और कार्य के प्रति प्रतिबद्धता को बढ़ावा मिलता है।