ICU में भर्ती मृदुल की पसलियां टूटीं, दीवान की रीढ़ की हड्डी में चोट, रॉबिन का पैर टूटा, बोले-जिंदगीभर भूल नहीं पाएंगे
मानसरोवर में खरबास सर्किल पर शुक्रवार रात को हादसे में घायल हुए 11 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। घायल दर्दनाक हादसे को भूल नहीं पा रहे हैं। भास्कर टीम ने एसएमएस घायलों से बात कर घटना की जानकारी ली। किसी की पसलियां टूटी हैं, किसी की रीढ़ ने साथ छोड़ दिया है। दर्द के बीच हर किसी की जुबान पर एक ही बात है- वो चीख-पुकार और डर का मंजर जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। उनका कहना है कि खरबास चौराहे पर रोज गाड़ियों की रेस लगती है, लेकिन देखने-सुनने वाला कोई नहीं। राकेश: घर की जिम्मेदारी मुझ पर है, दर्द से कैसे निकलूं सिर में चोट और पैर में फ्रैक्चर से जूझ रहे राकेश की आंखें भर आती हैं। कहते हैं पिता पहले से मानसिक रोगी हैं। मैं सबसे बड़ा हूं, पूरे घर की जिम्मेदारी मुझ पर है। अब इस हालत में पता नहीं कब ठीक हो पाऊंगा। दर्द से ज्यादा चिंता घर की है। रॉबिन सिंह: रफ्तार देखकर ही डर लग गया था एसएमएस में भर्ती मालपुरा निवासी रॉबिन सिंह के दिमाग में चोट लगी है। आंख, ठोडी औप गर्दन पर भी चोट आई है। इसके अलावा पैर में भी फ्रेक्चर है। उनका कहना है कि काफी दिनों से दाल-बाटी खाने का मन था। दोस्तों ने मना किया था, फिर भी चला गया। खाना खा ही रहे थे कि तेज रफ्तार कार आई। रफ्तार देखकर ही होश उड़ गए। पलभर में सब कुछ चीख-पुकार में बदल गया। बच गया, यही सबसे बड़ी बात है। मृदुल पंवार: आंख बंद करता हूं तो हादसा दिखता है जयपुरिया अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है 22 वर्षीय मृदुल पंवार। सांस लेने में तकलीफ है, पसलियां टूटी हैं। धीमी आवाज में कहते हैं- परिवार पालने को चित्तौड़गढ़ से आया हूं। सूप का ठेला लगाता हूं। बर्तन धो रहा था, तभी अचानक तेज रफ्तार कार आई और टक्कर मार दी। मैं उछलकर दूर जा गिरा। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। ऐसा लगा कार नहीं, काल बनकर आ गई हो। बाहर बैठे माता-पिता और भाई बस एक ही बात कह रहे हैं बच्चा बच जाए। दीवान गुर्जर: आंख खुली तो अस्पताल में था एसएमएस ट्रॉमा सेंटर के बेड पर लेटे दीवान गुर्जर हिल भी नहीं पा रहे। रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट है। आंखें छत पर टिकाए कहते हैं टक्कर के बाद कुछ याद नहीं। बेहोश हो गया था। जब आंख खुली तो अस्पताल में था। यकीन ही नहीं हुआ कि बच कैसे गया। दीपक: सपने थे सरकारी नौकरी के, हादसे ने तोड़ दिए मालपुरा निवासी दीपक की आवाज में मायूसी साफ झलकती है। उन्होंने कहा बीएसटीसी कर रहा हूं, सरकारी नौकरी का सपना था। भाई के साथ दाल-बाटी खाने गए थे। कुछ ही मिनटों में सब खत्म हो गया। आंख खुली तो खुद को एसएमएस अस्पताल में पाया।

