शवयात्रा पर बोले पूर्व MLA- यह राजनीतिक मजबूती:पानी मांगते हुए फर्श पर बैठे विधायक; माफिया के पीछे पुलिस की पैदल दौड़
नमस्कार बाड़मेर में अफसर से पानी मांगते-मांगते विधायकजी अचानक ठंडे फर्श पर बैठ गए। दौसा में जीते जी पूर्व विधायक की अर्थी निकाल दी गई। धौलपुर में बजरी माफिया ने ट्रैक्टर दौड़ाए तो पुलिस के जवानों ने पैदल दौड़ का दम दिखाया और बुजुर्ग महिला ने डॉक्टर को फीस की जगह आशीर्वाद दे दिया। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में... 1. जीवित पूर्व विधायक की अर्थी निकाली 'राम नाम सत्य है' यह शोर सुनकर घरों में दुबके लोगों ने भी रजाई फेंकी और यह जानने के लिए शोर की दिशा में भागे कि कौन मर गया? पता चला कि कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने पूर्व विधायक की अर्थी निकाली है। यह कृत्य विरोध स्वरूप किया गया था। इस आधार पर शवयात्रा भव्य और ऐतिहासिक थी। आदमकद पुतले का इंतजाम किया गया था जिसे कंधों पर रखकर कार्यकर्ता चल रहे थे। देहात में शादी-जलवा के कार्यक्रम में इस्तेमाल होने वाली बैंड-रेहड़ी भी थी, जिस पर पूर्व विधायक के नाम के साथ बताया गया था कि यह इनकी शवयात्रा है। लोग मुर्दाबाद और चोर है लिखे बैनर लेकर चल रहे थे। एक कार्यकर्ता ने कहा- इन्होंने प्रॉपर्टी डीलरों को परेशान कर रखा है। हर डील में हिस्सा लेते हैं। एक अन्य ने कहा- शास्त्रों में 14 तरह के लोगों को मरा हुआ मान लेना चाहिए। उसने 14 तरह के लोगों की लिस्ट सुनाई फिर कहा- पूर्व विधायक भी इनमें एक हैं। शवयात्रा इतनी लग्जरी रही कि पूर्व विधायक ने गदगद होकर कहा- मैं शवयात्रा का स्वागत करता हूं। लोकतंत्र में यह उनकी निकाली जाती है, जो राजनीतिक रूप से मजबूत होते हैं। 2. इंजीनियर के सामने फर्श पर बैठे विधायकजी अफसर 'रूल' हवाला दे रहे थे। रूल यह है कि अगर विधायक सत्ता वाली पार्टी का नहीं है तो उसके विधानसभा क्षेत्र में जन समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा। इसी बात को अफसर दूसरे शब्दों में समझा रहे थे। सामने कुर्सी पर बैठे विधायक जी समझने को तैयार नहीं। दोनों के बीच यह बात बाड़मेर के जलदाय विभाग के दफ्तर में हो रही थी। विधायक जी बात करते-करते अचानक कुर्सी छोड़ फर्श पर बैठ गए। बोले- चाहे स्टेट से बात करो, मंत्री से बात करो, किसी से भी बात करो। मेरे क्षेत्र के लोगों को पानी मिलना चाहिए। जब तक पानी नहीं मिलेगा, मैं यहीं धरने पर बैठूंगा। अफसर असहज हो गए। अफसर ने भी कुर्सी छोड़ दी। लेकिन बगल में धरना देने के लिए नहीं। वे खड़े हो गए। जो बातें अब तक समानांतर लेवल पर हो रही थीं, वो अब 'जमीन-आसमान' के स्तर पर होने लगीं। कुछ देर की जिद-बहस, मांग-मजबूरी, आग्रह-आक्रोश, अनुनय-विनय और फिर क्रमश: जिद-बहस.. के बाद धरना 'आश्वासन' नामक लॉलीपॉप पर खत्म हुआ। कुल मिलाकर धरने का निष्कर्ष यह रहा कि फर्श बहुत ठंडी थी। बाकी पानी तो 'रूल' से ही मिलेगा। 3. धौलपुर में बजरी माफिया के पीछे पुलिस की दौड़ इच्छाशक्ति होनी चाहिए। फिर टायरों का मुकाबला टांगों से किया जा सकता है। यह बात धौलपुर पुलिस ने साबित कर दी। घने कोहरे और ठंड के बावजूद बजरी माफिया चंबल से रेत चुरा रहे थे। इसकी पुख्ता सूचना मिलने पर पुलिस टीम दबिश देने निकली। टीम को बजरी से भरे दो-तीन ट्रैक्टर सड़क पर गुजरते नजर आए। उन्हें रुकने का इशारा किया गया। लेकिन माफिया को यह इशारा समझ नहीं आया। उन्होंने ट्रैक्टर रोकने की बजाय स्पीड बढ़ा दी। पुलिस के दो जवानों ने ट्रैक्टरों के पीछे दौड़ लगा दी। हालांकि वे कोई हल्क टाइप 'एवेंजर्स' नहीं थे कि दौड़ते हुए ट्रैक्टर को मुट्टी में उठा लेते। लेकिन इसके बावजूद वे ट्रैक्टरों के पीछे दौड़े। माफिया ने ट्रैक्टर की स्पीड बढ़ाने के लिए रोड पर ही बजरी खाली कर दी। हल्के होकर ट्रैक्टर की गति बढ़ गई। जवानों के पास गिराने के लिए हथियार थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और लगातार दौड़ते रहे। कुछ दूर जाने के बाद ट्रैक्टर नजर से ओझल हो गए। हालांकि तलाश करने पर एक ट्रैक्टर खेत में पलटी हुई हालत में मिला। लेकिन माफिया फरार होने में कामयाब रहे। ट्रैक्टर जब्त कर लिया गया। 4. चलते-चलते.. कमाई का लालच बहुत बढ़ गया है। कमाकर लोग शान दिखाने में पैसा खर्च करते हैं। कोठी-बंगला, कार। इज्जत भी ऐसे ही लोगों की होने लगी है। संस्कार दिखाने वाले को कोई नहीं पूछता। लेकिन ये सच नहीं है। कमाई भी कई तरह की होती है। कोई पैसा कमाता है, कोई आशीर्वाद कमाता है। पैसा खर्च हो जाता है, लेकिन कमाया हुआ आशीर्वाद कई तरह से भला करता है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से घूम रहा है। एक बुजुर्ग महिला दिव्यांग पोते को इलाज के लिए डॉक्टर के पास लाती है। इलाज के बाद वह कुछ नोट और सिक्के मुट्ठी में लेकर डॉक्टर की फीस चुकाने के लिए आगे बढ़ाती है। डॉक्टर सिर हिलाकर कहता है कि कोई बात नहीं, जाने दीजिए। बुजुर्ग महिला पैसे लेने की गुहार सी करती है, डॉक्टर हाथ जोड़कर इनकार कर देता है। इसके बाद बुजुर्ग दादी आगे बढ़ती है और डॉक्टर को प्यार से दुलारते हुए दोनों हाथों से उसे आशीर्वाद देती है। डॉक्टर साहब मरीजों से फीस तो लेते ही होंगे, लेकिन जो 'कमाई' उन्होंने बुजुर्ग महिला से की, वह अब वायरल हो गई है। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी...