किसान संघ ने नए बीज कानून पर दिए सुझाव:अमानक बीज बेचने पर मालिक को मिले सजा, MSP पर मिले मुआवजा
भारतीय किसान संघ ने केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे नए बीज कानून पर कृषि मंत्रालय को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य राजेंद्र पालीवाल ने झालावाड़ प्रवास के दौरान यह जानकारी दी। भारतीय किसान संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी की मुंबई में हुई बैठक में संसद में पेश होने वाले बीज कानून पर विस्तृत चर्चा की गई। इसी दौरान मंत्रालय को ये संशोधन प्रस्ताव भेजे गए हैं। संघ ने मांग की है कि सरकार अमानक खाद, बीज और दवाइयां बनाकर बेचने वालों पर तत्काल रोक लगाए और सख्त कार्रवाई करे। उनका कहना है कि बीज फेल होने पर सजा कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (मालिकों) को मिलनी चाहिए, न कि किसी अधिकारी को। वर्तमान में कंपनियां छोटे कर्मचारियों को जवाबदेह बनाकर खुद कार्रवाई से बच निकलती हैं। किसान संघ ने सुझाव दिया है कि तीन से अधिक शिकायतें आने पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए और इस जानकारी को पोर्टल पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए। इसके अतिरिक्त, बीज खराब होने पर पैदा होने वाली फसल का भुगतान भारत सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के आधार पर किसानों को तुरंत किया जाए। शिकायत का निराकरण फसल आने तक शीघ्र होना चाहिए। संघ ने यह भी मांग की है कि सरकार बीज के विक्रय मूल्य (MRP) पर निगरानी रखे। उनका आरोप है कि बाजार में लाखों रुपए प्रति किलो के हिसाब से बीज बेचकर किसानों का शोषण किया जा रहा है। उन्होंने आगे बताया कि जीएम बीज अर्थात जीन बदलकर तैयार किया हुआ बीज मनुष्य मात्र के लिए हानिकारक है। उसे किसी भी कीमत पर अनुमति नहीं दी जाए। मछली के जिन से बना बीज फसल को पाले से बचाने के लिए माइनस डिग्री टेंपरेचर वाले क्षेत्र की मछलियों के जिन को बीज में डालकर जीएम बीज बनाया जा रहा है, ताकि पाला अर्थात अत्यधिक ठंड पढ़ने पर फसल नहीं जले खराब नहीं हो, इसी प्रकार टमाटर की सतह को सख्त करने के लिए छिपकली के जिन को निकाल कर टमाटर का जीएम बीज बनाया जा रहा है। यह सब मानव मात्र के डीएनए को बदलने का खतरनाक प्रयास है अतः भारत में जी एम सीड्स तथा फसलों के प्रवेश पर किसी भी कीमत पर अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। यही कारण है कि भारतीय किसान संघ शुरू से ही जीएम फसलों का पुरजोर विरोध करता आ रहा है तथा भारत सरकार अमेरिका के टैरिफ दबाव के बावजूद भी जीएम फसलों को अनुमति नहीं दे रही है