संजय राव ने पोस्टर-बैनर में खुद को बताया जिलाध्यक्ष:NSUI के कार्यकारी-जिलाध्यक्ष पर पद के दुरुपयोग का आरोप, जारी हुआ 'कारण बताओ नोटिस'
कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई में गुटबाजी का मामला एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। चित्तौड़गढ़ जिले के एनएसयूआई कार्यकारी जिला अध्यक्ष संजय राव को प्रदेश कार्यालय की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में उन पर अपने पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। संजय राव पर आरोप है कि वे NSUI के कार्यकारी जिलाध्यक्ष होने के बावजूद खुद को जिलाध्यक्ष बताया। अब इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस और उसके छात्र संगठन में चल रही अंदरूनी खींचतान पर सवाल खड़े हो गए हैं। कांग्रेस में गुटबाजी की जमीनी हकीकत कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व भले ही सार्वजनिक तौर पर गुटबाजी से इनकार करता रहा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही दिखाई दे रहे हैं। चित्तौड़गढ़ जिले की कांग्रेस इकाई में ही नहीं, बल्कि पार्टी के अग्रणी छात्र संगठन एनएसयूआई में भी गुटबाजी का रंग साफ नजर आ रहा है। संगठन के भीतर अलग-अलग गुट सक्रिय हैं, जिससे अनुशासन और एकजुटता प्रभावित हो रही है। संजय राव को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस इसी गुटबाजी के बीच एनएसयूआई के कार्यकारी जिला अध्यक्ष संजय राव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। यह नोटिस प्रदेश महासचिव मुकेश नरणिया के हस्ताक्षर से जारी हुआ है। नोटिस में बताया गया है कि संजय राव को संगठन द्वारा कार्यकारी जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने खुद को जिला अध्यक्ष के रूप में प्रचारित किया। जिला अध्यक्ष बताकर प्रचार करने पर आपत्ति नोटिस के अनुसार संजय राव द्वारा पोस्टर, बैनर और सोशल मीडिया के माध्यम से खुद को एनएसयूआई जिला अध्यक्ष बताया गया। इसके साथ ही संगठन से जुड़े कई कार्यक्रम खुद से आयोजित करने की भी शिकायतें सामने आई हैं। संगठन का कहना है कि यह हरकत संगठन के संविधान और अनुशासन के खिलाफ है और इससे संगठनात्मक व्यवस्था प्रभावित होती है। स्वागत कार्यक्रम में भी NSUI जिलाध्यक्ष का नेम प्लेट हाथ में था बताया जा रहा है कि नियुक्ति के पहले ही दिन संजय राव के स्वागत कार्यक्रम के दौरान भी उन्होंने खुद को एनएसयूआई का जिला अध्यक्ष बताते हुए नेम प्लेट हाथ में ले रखी थी। इसी घटना के बाद संगठन में असंतोष बढ़ गया था। इसके बाद कई प्रोग्राम में वे खुद को जिलाध्यक्ष ही बताते रहे। यह सब मामला प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचा। इसके बाद प्रदेश स्तर पर इस पर संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की गई। कन्हैया लाल वैष्णव हैं अधिकृत जिलाध्यक्ष बता दे कि एनएसयूआई के अधिकृत जिला अध्यक्ष कन्हैया लाल वैष्णव हैं, जबकि संजय राव को कार्यकारी जिला अध्यक्ष बनाया गया था। एनएसयूआई जिलाध्यक्ष कन्हैया लाल वैष्णव ने बताया कि पहले संगठन में चुनाव के जरिए जिला अध्यक्ष का चयन होता था, लेकिन पिछले 5 से 7 वर्षों से चुनाव नहीं हो रहे हैं और नॉमिनेशन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। प्रदेश के कुछ जिलों में कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में ज्यादातर जिलों में एक ही जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। हालांकि जिन जिलों में छात्र राजनीति ज्यादा सक्रिय रहती है, वहां संगठन को मजबूत रखने के लिए एक अतिरिक्त कार्यकारी जिला अध्यक्ष भी बनाया जाता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य संगठनात्मक कामकाज को सुचारू रूप से चलाना है, लेकिन गुटबाजी के कारण अब यही व्यवस्था विवाद का कारण बनती नजर आ रही है। अभी शनिवार को प्रदेश कार्यालय से एक कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जो एनएसयूआई के कार्यकारी जिला अध्यक्ष संजय राव के लिए था। प्रदेश महासचिव मुकेश नरणिया द्वारा जारी नोटिस में लिखा गया है कि संजय राव के खिलाफ संगठन को लेकर कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उन पर अपने पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। संगठन द्वारा संजय राव को चित्तौड़गढ़ का कार्यकारी जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पोस्टर, बैनर और सोशल मीडिया के माध्यम से खुद को जिला अध्यक्ष के रूप में प्रचारित किया। साथ ही संगठन के कार्यक्रमों को अलग से आयोजित करने की भी शिकायतें सामने आई हैं। यह कृत्य संगठन की संवैधानिक व्यवस्था और अनुशासन के खिलाफ है, जिससे कार्यकर्ताओं में भ्रम, असंतोष और अनुशासनहीनता की स्थिति पैदा होती है। संगठन में हर पद की एक निश्चित गरिमा, जिम्मेदारी और सीमा होती है, जिसका उल्लंघन संगठनात्मक मर्यादा को प्रभावित करता है। संजय राव को 48 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रदेश कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। समय पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। कार्यकारी जिलाध्यक्ष ने रखा अपना पक्ष वहीं, संजय राव ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कार्यकर्ता मेरी कार्यशैली से प्रभावित होकर उनके नाम के आगे जिला अध्यक्ष लिखते हैं और कोई भी मुझे कार्यकारी कहना पसंद नहीं करता। संगठन में जिम्मेदारी मिलने के बाद से वे सबसे ज्यादा सक्रिय होकर काम कर रहा हूं। जबकि जिले के अधिकृत अध्यक्ष डमी कैंडिडेट की तरह बैठे हुए हैं और आज दिन तक उन्होंने कोई भी कार्यक्रम आयोजित नहीं किया है। चित्तौड़गढ़ की छात्र राजनीति उन्हें ही जिला अध्यक्ष के रूप में मानती है। अब कोई अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल में क्या लिखता है, इसे वे बदल नहीं सकते। मेरा इरादा किसी भी नियम या संगठनात्मक मर्यादा को तोड़ने का नहीं था। गुटबाजी के चलते जिले में दो जिला अध्यक्ष बनाए गए हैं, लेकिन कौन सक्रिय है और कौन नहीं, यह पूरे चित्तौड़गढ़ जिले को पता है। आगे की कार्रवाई पर टिकी नजरें संजय राव को जारी नोटिस के बाद अब पूरे मामले पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। संगठन की नजर उनके जवाब पर टिकी हुई है। वहीं यह मामला कांग्रेस और एनएसयूआई में गुटबाजी की हकीकत को एक बार फिर उजागर करता नजर आ रहा है।



