आरटीई पर हाईकोर्ट का अहम फैसला:कहा- प्रदेश में निजी स्कूलों को प्री-प्राइमरी से फर्स्ट क्लास तक देना होगा RTE में प्रवेश
निजी स्कूल जिस भी कक्षा में प्रवेश दें उसमें 25% सीटों पर आरटीई के तहत प्रवेश देना होगा हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आरटीई (राइट टू एजुकेशन) में प्रवेश से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि प्रदेश के निजी स्कूलों को प्री-प्राइमरी से फर्स्ट क्लास तक आरटीई के तहत बच्चों को प्रवेश देना होगा। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि निजी स्कूल इन कक्षाओं में से जिस भी कक्षा में विद्यार्थियों को प्रवेश देती है, उस कक्षा में 25 फीसदी सीटों पर आरटीई के तहत प्रवेश देने होंगे। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा व जस्टिस बीएस संधू की खंडपीठ ने यह आदेश अभ्युत्थानम सोसायटी व अन्य की पीआईएल पर गुरुवार को सुनाते हुए दिया। साथ ही खंडपीठ ने राज्य सरकार व निजी स्कूलों को राहत नहीं देते हुए उनकी अपीलों को खारिज कर दिया। खंडपीठ ने कहा कि यदि स्कूल पहली कक्षा में अतिरिक्त सीटों पर सामान्य प्रवेश दे रहे हैं तो उसी अनुपात में 25 फीसदी सीटों पर आरटीई से भी प्रवेश दिए जाएगे। इस मामले में खंडपीठ ने राज्य सरकार, निजी स्कूलों व अन्य पक्षकारों की बहस पूरी होने के बाद 4 नवंबर को फैसला बाद में देना तय किया था। पीआईएल में राज्य सरकार की अधिसूचना को दी थी चुनौती पीआईएल में दरअसल राज्य सरकार की 2020 की उस अधिसूचना को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी जिसमें कहा था कि निजी स्कूलों को आरटीई के तहत केवल पहली कक्षा में प्रवेश देने पर ही फीस का पुनर्भरण किया जाएगा। इस अधिसूचना पर कहा कि कई स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं होने के कारण उनमें पहली कक्षा से पहले ही प्रवेश हो जाता है। इस कारण से निजी स्कूल उनमें आरटीई के तहत प्रवेश नहीं देते हैं। इसके जवाब में स्कूल प्रशासन की ओर से कहा कि स्कूलों के पास सीमित संसाधन होते हैं। वहीं राज्य सरकार ने 2009 से लेकर अभी तक स्कूल फीस के पुनर्भुगतान को लेकर नियम नहीं बनाए हैं। जिस पर राज्य सरकार के एएजी सुरेन्द्र सिंह नरूका ने कहा कि प्री प्राइमरी व पहली कक्षा दोनों लेवल पर आरटीई में प्रवेश हो तो प्री प्राइमरी में होने वाले प्रवेशों के लिए भी केन्द्र सरकार से निर्धारित फीस की पुनर्भुगतान राशि राज्य को दिलाई जाए। वहीं केन्द्र सरकार ने कहा कि आरटीई में प्रवेश की व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्यों की है, केन्द्र की नहीं। खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आरटीई के तहत प्रवेश देने पर विस्तृत दिशा-निर्देश देते हुए स्कूल संचालकों व राज्य सरकार की अपीलों को खारिज कर दिया। खंडपीठ में अपील लंबित होने के चलते कई स्कूल जो प्री-प्राइमरी में एडमिशन दे रही थी, उन्होंने पहली कक्षा में एडमिशन देने से मना कर दिया। वहीं, कई स्कूल प्री-प्राइमरी के सभी लेवल में एडमिशन नहीं दे रही थी। गौरतलब है कि खंडपीठ में अपील लंबित होने के चलते कई स्कूल जो प्री-प्राइमरी में एडमिशन दे रहे थे, उन्होंने पहली कक्षा में एडमिशन देने से मना कर दिया। वहीं, कई स्कूल प्री-प्राइमरी के सभी लेवल में एडमिशन नहीं दे रही थे।