महिला कांस्टेबल से गैंगरेप मामला; SIT करेगी जांच, 8 साल पहले की घटना की सत्यता जानना बड़ी चुनौती
भास्कर संवाददाता | चूरू महिला कांस्टेबल की तरफ से सामूहिक दुष्कर्म को लेकर दर्ज करवाए गए मामले की जांच अब एसआईटी की टीम करेगी। पिछले दो माह से गैरहाजिर व आपराधिक मामलों में संलिप्तता के कारण निलंबित चल रही महिला कांस्टेबल ने वर्ष 2017 में एक व्यक्ति और वर्ष 2019 में तत्कालीन एसएचओ सहित चार पुलिसकर्मियों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था। इसको लेकर 7 जनवरी को सिद्धमुख थाने में मामला दर्ज हुआ था। मामले की निष्पक्ष जांच को लेकर एसपी जय यादव ने सात सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। एसपी यादव ने शुक्रवार को ये आदेश जारी किए। टीम का नेतृत्व राजगढ़ के एएसपी रिछपाल सिंह करेंगे। टीम में आईपीएस अभिजीत पाटिल, साइबर थाने के डीएसपी विजय मीणा, सरदारशहर एसएचओ मदनलाल विश्नोई, महिला थाना एसएचओ रचना विश्नोई, राजगढ़ एएसपी कार्यालय के एएसआई अजीत कुमार, साइबर सेल के एएसआई भागीरथ व कांस्टेबल रमाकांत शामिल हैं। गठित टीम सभी एंगल से इस मामले की जांच करेगी। ^मामले में सच्चाई सामने लाने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। दोषी पाए जाने पर आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि कोई निर्दोष फंसे नहीं ये भी सुनिश्चित किया जाएगा। पूरे मामले की निष्पक्ष व त्वरित जांच करवाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। -जय यादव, एसपी, चूरू महिला कांस्टेबल द्वारा एसपी कार्यालय में परिवाद दिए जाने के बाद सिद्धमुख थाने में मामला दर्ज कर लिया गया। पीड़ित महिला कांस्टेबल का मेडिकल मुआयना भी करवा लिया गया। अब एसआईटी टीम का भी गठन कर दिया गया है। दूसरी तरफ मामले की पेचीदगियां पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहेगी। महिला कांस्टेबल की तरफ से दर्ज मामले में वर्ष 2017 से 2025 के बीच अलग-अलग मौकों पर उसे डरा-धमकाकर और नशीला पदार्थ पिलाकर थाने व होटल में उसके साथ दुष्कर्म करने का उल्लेख किया गया है। शिकायत में वर्ष 2017 में एक व्यक्ति और वर्ष 2019 में तत्कालीन एसएचओ सहित चार पुलिसकर्मियों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि पीड़ित महिला कांस्टेबल खुद पिछले दो माह से गैरहाजिर रहने और आपराधिक मामलों में संलिप्तता के कारण निलंबित चल रही है। महिला कांस्टेबल इतने वर्ष तक चुप क्यों रही और इतना समय बीत जाने के बाद मामला दर्ज करवाया है। ऐसे में पुलिस को अनुसंधान करने में चुनौती आएगी। सबसे बड़ी चुनौती तकनीकी साक्ष्य इक्कठा करने में खासी मेहनत करने की रहेगी। ऐसे में महिला कांस्टेबल द्वारा लगाए गए आरोप की सत्यता का भी पता लगाया जाएगा। मामले में कहीं महिलाओं के लिए बने कानून का दुरुपयोग तो नहीं हो रहा, इसकी भी जांच होगी।