प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना:कौशल विकास को बढ़ाने में प्रदेश का दूसरा स्थान, यहां सबसे ज्यादा 1.27 लाख कारीगर प्रशिक्षित किए, इनमें कारपेंटर आगे
प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना कारगर साबित हो रही है। योजना में अब तक ढाई लाख से ज्यादा लोगों ने पंजीकरण करवाया है। इनमें से कौशल विकास के लिए 1.27 लाख लोगों ने प्रशिक्षण ले लिया है। अब इन्हें बिना किसी गारंटी के ऋण दिया जाएगा। इससे वे अपना उद्योग या व्यवसाय स्थापित कर सकेंगे। इस योजना के अंतर्गत 18 विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें बढ़ई, मोची, नाई, सुनार और अन्य पारंपरिक कार्य शामिल हैं। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में प्रशिक्षण लेने वालों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है। कुछ राज्यों ने विशिष्ट ट्रेड्स जैसे " सुनार' या "टोकरी बुनने' में महारत दिखाई है, वहीं राजस्थान "कारपेंटर' और "सैलून' जैसे क्षेत्रों में आगे हैं। राजस्थान में इस योजना के आंकड़े बेहद प्रभावशाली हैं। प्रदेश में अब तक कुल 1.27 लाख से ज्यादा युवाओं को विभिन्न 18 ट्रेड्स में प्रशिक्षित किया है। इनमें कारपेंटर का सर्वाधिक 44 हजार युवाओं ने प्रशिक्षण लिया है। कर्नाटक इस सूची में 55 हजार के साथ सबसे ऊपर है। जबकि उत्तर प्रदेश 33 हजार आंकड़े के साथ तीसरे नंबर पर है। प्रदेश में दूसरे स्थान पर फुटवियर कारीगर है। चर्म शिल्प की नई तकनीक सीखने के लिए 25 हजार से ज्यादा युवा ट्रेनिंग लेकर काम शुरू करेंगे। इसी तरह सैलून के क्षेत्र में कॅरिअर शुरू करने के लिए 21 हजार से ज्यादा युवाओं ने प्रशिक्षण हासिल किया है। इस फील्ड में भी राज्य उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश को पीछे छोड़कर पहले स्थान पर है। इसी तरह फूलों के काम में 14 हजार से ज्यादा, टूलकिट निर्माण व सोने-चांदी के काम में 10 हजार से ज्यादा युवाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वहीं, खिलौना निर्माण को लेकर भी राजस्थान के युवाओं ने रुचि दिखाई है। इस क्षेत्र के लिए 7.5 हजार से ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है। अन्य ट्रेड्स में टोकरी और झाड़ू बनाने वाले 4252, शस्त्रकार वाले 1289, नाव निर्माण करने वाले 301 और जाल बनाने वाले 732 युवा शामिल हैं। 3 लाख का बिना गारंटी ऋण का प्रावधान प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत शिल्पकारों और कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 3 लाख रुपए तक का ऋण बिना किसी गारंटी के मिलता है। यह दो चरणों में दिया जा रहा है। पहली किस्त 1 लाख रुपये तक है। इसे 18 महीने में पुनर्भुगतान करना होता है। फिर दूसरी किस्त में 2 लाख रुपए तक मिलता है। इस ऋण पर लाभार्थी को केवल 5% वार्षिक ब्याज देना होता है। सरकार 8% तक पर सब्सिडी देती है। वहीं, प्रशिक्षण पर आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए 15 हजार रुपए और 500 रुपए प्रतिदिन का भत्ता दिया जाता है।